Sunday, April 21, 2024

निमने बतिया लोग के ख़राब लागत बा -नूरैन अन्सारी

निमने बतिया लोग के ख़राब लागत बा.
धतूर जइसन कडुआ गुलाब लागत बा.

करीं झूठे बड़ाई त खूबे गच बाटे लोग,
साँच कहला पर मुंह में जॉब लागत बा.

बाबू माँगत बाडेन बुढऊ बाबू जी से पानी,
अब त बाप नौकर आ बेटा नवाब लागत बा.

अरे..मुंह ना मारी अईसन ज़माना के भाई,
जेहि में अमृत से बढ़िया शराब लागत बा.

मत पूछी त बढ़िया होई संस्कार के दशा,
बबुनी के भर देहि के कपड़ा ख़राब लागत बा.

अब लद गईल जुग ईमानदारी के “नूरैन”,
भाई-भाई में पाई-पाई के हिसाब लागत बा.

टटका टटका

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