Sunday, April 21, 2024

भोजपुरी साहित्य

दुश्मन के थुथुन थूरल जरूरी बा – विजय दिवस विशेष

आज विजय दिवस पर भोजपुरी कवि श्री मनोज सिंह ‘भावुक’ के...

कोख लुटाइल महतारी के अंतरात्मा : विजय दिवस

आज विजय दिवस पर भोजपुरी कवि श्री मनोज सिंह ‘भावुक’ के...

गुंजित आज भइल भोजपुरी – किशोरी शरण शर्मा

गुंजित आज भइल भोजपुरी, सगरे देश-जहान में,सप्त राग कल-कल...

केतनो रोई बाकिर अखिया लोरात नइखे – नूरैन अन्सारी

जीवन में दुःख के बावजूद आंसू नहीं बहते, महंगाई से आदमी बेहाल है पर जिंदगी का बोझ उतरता नहीं| बाढ़ और सूखे से किसान प्रभावित होते हैं, अब खुशी से खेती नहीं होती| लोग जरूरत पर साथ नहीं देते, और आंतरिक पीड़ा छिप के सही जाती है।

घर से लेके बहरा तक हम धावत रह गइनी – नूरैन अन्सारी

साख आपन ज़िनगी भर बचावत रह गइनी, कुछ बेमतलब के...

बाकिर हर केहु रउआ खानि उदास नइखे – नूरैन अंसारी

अरे दुःख ये दुनिया में केकरा पास नइखे. बाकिर हर...

निमने बतिया लोग के ख़राब लागत बा -नूरैन अन्सारी

निमने बतिया लोग के ख़राब लागत बा. धतूर जइसन कडुआ...

बर पीपर के छाँव के जइसन बाबूजी

बर पीपर के छाँव के जइसन बाबूजीहमरा भीतर गाँव...

जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी

दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जीजब-जब...

जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल – मनोज भावुक

जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइलरोटी...

दिल चुरावे ना आवेला उनका-मनोज भावुक

दिल चुरावे ना आवेला उनका, गुल खिलावे ना आवेला उनका- Dil chorawe na aawelaunka gul khilave na aavela unka