Monday, April 22, 2024

ई ज़िनगी ह, येही लेखा चलत रही – नूरैन अन्सारी

केहु साथ दी , केहु छलत रहीं.
केहु खुश होई, केहु जलत रहीं.
ई ज़िनगी ह, येही लेखा चलत रहीं.

दुख – सुख तऽ जात आवत रही
कबो हँसाइ त कबो रूलावत रही
सूरज उगत रहीं ,सूरज ढलत रही
ई ज़िनगी ह ,येही लेखा चलत रहीं

जे आपन बा उहो पराया होई
बहुत कुछ जिनगी में नया होई
केहु धधाई , केहूं हाथ मलत रहीं
ई ज़िनगी ह ,येही लेखा चलत रहीं

आज अनहरियाँ बा त अजोरों होई
ये रतिया के एक दिन भोरों होई
केहु सोहाई, केहु आँख में हलत रही
ई ज़िनगी ह , येही लेखा चलत रहीं

टटका टटका

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