Saturday, May 25, 2024

बर पीपर के छाँव के जइसन बाबूजी

गीत मनोज भावुक जी का है ।

बर पीपर के छाँव के जइसन बाबूजी
हमरा भीतर गाँव के जइसन बाबूजी

छूटल गाँव, छिटाइल लावा भुंजा के,
नेह लुटाइल साथी रे एक दूजा के,
शहर-शहर में जिनिगी छिछिआइल, माँकल
बंजारा जिनिगी, धरती धीकल, तातल
पाँव पिराइल मन थाकल रस्ता में जब
मन के भीतर पाँव के जइसन बाबूजी
दुःख में प्रभु के नांव के जइसन बाबूजी!

बर पीपर के छाँव के जइसन बाबूजी
हमरा भीतर गाँव के जइसन बाबूजी

टटका टटका

इहों पढ़ल जाव