Saturday, May 25, 2024

Pooja Hegde 42 Beautiful Wallpapers Download

Source : Pooja Hegde Instagram

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केतनो रोई बाकिर अखिया लोरात नइखे – नूरैन अन्सारी

जीवन में दुःख के बावजूद आंसू नहीं बहते, महंगाई से आदमी बेहाल है पर जिंदगी का बोझ उतरता नहीं| बाढ़ और सूखे से किसान प्रभावित होते हैं, अब खुशी से खेती नहीं होती| लोग जरूरत पर साथ नहीं देते, और आंतरिक पीड़ा छिप के सही जाती है।

करके देखीं रउओ मंथन – ओमप्रकाश पंडित ‘ओम’

इस कविता में जीवन के गहरे बंधन और मुश्किलें व्यक्त की गई हैं। आत्म-विश्लेषण करे बिना इंसान को कुछ नहीं मिलता, और अहंकार से वह अलग-थलग पड़ जाता है। आपसी भेदभाव से समाज बंटता है, पर जो भ्रम से परे हो उसे कोई नहीं हरा सकता। इंसान को मानवता से प्रेम करना चाहिए।

रसे-रसे महुवा फुलाइल हो रामा उनुका से कहि दऽ – डॉ अशोक द्विवेदी

‘साहित्य श्री’ (कन्हैयालाल प्राग्दास हिन्दी संस्थान, लखनऊ) 1994,‘भोजपुरी-शिरोमणी’,(अखिल भारतीय भोजपुरी परिषद, उ॰प्र॰), ‘राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार, 1998 (हिन्दी संस्थान, उ॰प्र॰),‘लोकपुरुष’ (विश्व भोजपुरी सम्मेलन एवं स्वदेशी मंच, वाराणसी),‘भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान (भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इण्डिया एवं सन्डे इन्डियन, नई दिल्ली)आदि कई संस्थानों से सम्मानित। भोजपुरी दिशा बोध की पत्रिका पाती का वर्ष 1979 से निरंतर प्रकाशन और संपादन।

घर से लेके बहरा तक हम धावत रह गइनी – नूरैन अन्सारी

साख आपन ज़िनगी भर बचावत रह गइनी, कुछ बेमतलब के...

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