Saturday, May 25, 2024

चिड़िया के पास अपना घोसले नइखे,इस्तीफा के बाद रवीश कुमार

अडानी ग्रुप की ओर से एनडीटीवी के प्रमोटर कंपनी के टेकओवर के बाद रवीश कुमार चैनल से इस्तीफा दे देले बाड़े. एनडीटीवी ग्रुप के प्रेसिडेंट सुपर्णा सिंह सगरो कर्मचारियन के मेल भेज के बतवली की रवीश कुमार के इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गइल बा.

उनुका से पहिले एनडीटीवी के प्रमोटर कपनी आरआरपीआर से प्रणव रॉय अउर राधिका रॉय इस्तीफा दे दिहलें.

एही साल अडानी ग्रुप द्वारा मीडिया कंपनी एनडीटीवी में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18 फीसदी हिस्सा खरीद लिहल गइल रहे आ बाकी के हिस्सा खरीदे खातिर ओपन ऑफर लियावे के घोषणा कइल गइल रहे. आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी ह.

इस्तीफा के बाद का कहले रवीश कुमार?

एनडीटीवी से इस्तीफा के बाद रवीश कुमार एगो वीडियो संदेश जारी कइलें.

वीडियों में उहा के कहलें की ‘भारत मे स्वतंत्र पत्रकारिता के स्वर्णिम युग कबो खत्म नइखे भइल.लेकिन आज के दौर की तरह लबो भस्म युग भी नइखे रहल. जेकरा में पत्रकारिता के हर चीज भस्म कइल जात होखे.

मौजूदा मीडिया के आलोचना करत रवीश कुमार कहले कि ‘गोदी मीडिया आ सरकार पत्रकारिता के आपन मतलब जनता के ऊपर थोपल चाहत बाड़ें. एह समय अपना संस्थान के ऊपर कुछ भी ना कहब काहें से की भावुकता में आप तटस्थ ना रह पाइब. एनडीटीवी में 26-27 साल रहल बानी जवन की अब याद बन गइल बा आ ई सब किस्सा सुनावे में काम आई.’

‘हमके सब से कुछ न कुछ मिलल बा, हम सभकर आभारी बानी. केहू एक के जिक्र आ बाकी के लोग के छोड़ दिहल न्यायसंगत ना रही. जब बेटी बिदा होले त पीछे मुड़ के अपना मायके के देखेले , हम ओहि स्थिति में बानी.’

आज के सांझ अइसन बा कि चिड़िया के पास आपन घोसले नइखे. केहू ओकर घोसला ले गइल लेकिन ओकरा सोझा खुला आसमान जरूर नज़र आ रहल बा.

रवीश कुमार कुमार कहलें कि ‘हमरी सोझा दुनिया बदलत रहल बा लेकिन हम टेस्ट मैच के प्लेयर की तरह खेलले बानी. पर अब केहू आके मैचे खत्म कर देले बा. टी20 में बदल देले बा. जनता के चवन्नी समझे वाला जगत सेठ हर देश मे बाड़े, आ अपनो देश मे भी. अगर उ लोग दावा भी करे कि आप तक सही सूचना पहुंचावे के बा, त एकर मतलब होइ की उ अपना जेब मे डॉलर रख के आपकी जेब मे चवन्नी पहुँचावे के फेर में बाड़े.

‘पत्रकार एगो खबर लिख दे त जगत सेठ मुकदमा कर देलें आ फिर सत्संग में जाके प्रवचन दीहें की उ पत्रकारन के भला कइल चाहत बाड़ें. जनता अतना त समझते होइ.

टटका टटका

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